
दानापुर. दानापुर व्यवहार न्यायालय के जिला अपर व सत्र न्यायाधीश सात संतोष कुमार गुप्ता ने शुक्रवार को पति की हत्या मामले में आरोपी पत्नी अमृता देवी को दोषी करार देते हुए आजीवन सश्रम कारावास के साथ पचास हजार अर्थदंड की सजा सुनाई।

प्रभारी अपर लोक अभियोजक रामेश्वर प्रसाद ने बताया कि पालीगंज थाना कांड संख्या 299/21और सेशन ट्रायल संख्या 447/23 में अरवल जिले के कलेर के बुद्धन बिगहा निवासी अमित कुमार की हत्या का आरोप उनकी पत्नी अमृता देवी, बहनोई मिथिलेश सिंह व उनक मां देवंती देवी पर था। उन्होंने बताया कि मृतक के पिता लखनदेव यादव ने पालीगंज थाना में मृतक के पत्नी बहनोई व मां समेत अज्ञात पर हत्या करने का मामला दर्ज कराया था। दर्ज प्राथमिकी में बताया था कि छह साल पूर्व अमित की शादी पालीगंज के पीपरादाहा निवासी नंदलाल यादव के पुत्री अमृता देवी के साथ हुई था। शादी के बाद से अमृता का पति के साथ मधुर संबंध नही था और अमृता का अपने बहनोई मिथिलेश के साथ अवैध संबंध था। जिसको लेकर मिथिलेश ने अमित को जान मारने की धमकी भी दिया था।
उन्होंने बताया कि 13 अगस्त 21 को अमृता देवी मैके से ससुराल आई और चार दिन रहने के बाद रक्षा बंधन को लेकर अपने पति अमति को बहला-फुसला कर 17 अगस्त को अपने मैके पालीगंज के पीपरादाहा ले गई और 18 अगस्त को अमृता व उसकी मां देवंती देवी व बहनोई मिथिलेश सिंह ने जहर देकर हत्या कर शव को घर के बाहर रखकर फरार हो गया था। एपीपी ने बताया कि शुक्रवार को एडीजे 7 संतोष कुमार गुप्ता ने अभियोजन व बचाव पक्ष की दलीलों को सुनने व उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपित पत्नी अमृता देवी को दोषी करार देते हुए आजीवन सश्रम कारावास व 50 हजार जुर्माने की सजा सुनायी है। उन्होंने बताया कि आरोपी मिथिलेश व देवंती देवी पर अनुसंधान चल रहा है।

सूचक के अभिवक्ता रिंकी कुमारी ने बताई कि प्रेमी (बहनोई मिथिलेश सिंह) के संग पूरा परिवार मिलकर पति की हत्या करने का मामला है। उन्होंने बताई कि जांच के दौरान मृतक का पोस्टमार्टम और फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला रिपोर्ट से पता चला कि मृतक के शरीर के अन्दर “Highly poison” पाया गया और मृतक के गले के ऊपर निशान भी पाया गया, जिससे प्रतीत होता है कि आत्म ह्त्या नहीं ह्त्या का मामला है। न्यायालय गवाहों, अभियोजन व बचाव पक्ष की दलीलों को सुनने हुए, उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपित पत्नी अमृता देवी को दोषी करार देते हुए आजीवन सश्रम कारावास 50 हजार जुर्माने की सजा सुनाई गई। मृतक के पिता को दानापुर व्यवहार न्यायालय के जिला अपर व सत्र न्यायाधीश सात संतोष कुमार गुप्ता के द्वारा न्याय दिया गया।